जय यदुनंदन जय जगवंदन, जय वासुदेवदेवकी नंदन
जय यशोदासुत नंददुलारे, जय प्रभूभक्तन के रखवारे
जय नटनागर नागनथैया, कृष्णकन्हैया धेनुचरय्या
पुनी नख पार प्रभू गिरीवरधारो, आवो दिनन कष्टनिवारो
जय यशोदासुत नंददुलारे, जय प्रभूभक्तन के रखवारे
जय नटनागर नागनथैया, कृष्णकन्हैया धेनुचरय्या
पुनी नख पार प्रभू गिरीवरधारो, आवो दिनन कष्टनिवारो
बन्सीमधुर अधरधरि तेरी, होवे पूर्ण मनोरथ मेरी
आओ हरी पुनी माखन चाखो, आज लाज भक्तन की राखो
गोलकपोल चिबुक अरुणारे, मृदुलमुस्कान मोहिनी दारे
रणजीत राजीव नयन विशाला, मोर मुकुट वैजयंती माला
कुंडल श्रवण पीतपात आचे, कटी किंकिणी काछन काछे
नील जलज सुंदर तनु सोहे, छवी लाखी सूर नर मुनी मना मोहे
मस्तक तिलक अलक घुन्घराले, आओ श्याम बंसुरी वाले
करी पाई पान, पुतानाहीन तार्यो, आका बाका कागासूर मार्यो
मधुवन जलत अग्नी जाब ज्वाला, भये शीतल, लखितहीन नंदलाला
सुरपती जब ब्रिज चाढ्यो रिसाई, मुसर धर बारी बर्साई
लगत लगत ब्रिज चाहन बहायो, गोवर्धन नखधारी बचायो
लाखी यशोदा मन भ्रम अधिकाई, मुख महान चौदाह भुवन दिखाई
दुष्ट कंस अति उधम माचायो, कोटी कमल कहन फुल मंगायो
नाठी कालीयाहीन तब तुम लिन्हे, चरणचिन्ह दाई निर्भय कीन्हे
करी गोपिन संग रास विलासा, सबकी पुरन करी अभिलाषा
केतिक महा असुर संहार्यो, कंसही केश पकडी दाई मार्यो
मातु पिता की बंदी छुडायी, उग्रसेन कहन राज दिलायी
माही से मृतक छाहो सुत लायो, मातु देवकी शोक मीटायो
भोमासुर मुरा दैत्य संहारी, लाये शतदश साहस कुमारि
दाई भिनहीन त्रीन्चीर संहारा, जरासिंधू राक्षस कहन मारा
असुर वृकासूर आदिक मार्यो, भक्तन के तब कष्ट निवार्यो
दिन सुदामा के दुख तार्यो, तंदुल तीन मूठी मुख दार्यो
प्रेम के साग विदुरा घर मांगे, दुर्योधन के मेवा त्यागे
लाखी प्रेमकी महिमा भारी, नौमि श्याम दिनन हितकारी
मारथ के पार्थ रथ हांके, लिये चक्र कर नहीन बाल थाके
नीज गीता के ग्यान सुनाये, भक्तन हृदय सुधा बरसाये
मीरा थी ऐसी मतवाली, विष पी गयी बजाकर ताली
राणा भेजा सांप पिटारी, शालिग्राम बने बनवारी
नीजमाया तुम विधिहीन दिखायो, उरते संशय सकल मीटायो
तव शत निंदा करी तत्काला, जीवन मुक्त भयो शिशुपाला
जबहीन द्रौपदी तेर लगाई, दीनानाथ लाज अबजाई
असा अनाथ के नाथ कन्हैया, दुबत भंवर बचावात नैया
सुंदरदास आस उर धारी, दयादृष्टी कीजे बनवारी
नाथ सकल मम कुमती निवारो, छामोबेगी अपराध हमारो
खोलो पट अब दर्शन दीजे, बोलो कृष्ण कन्हैया कीजै
यह चालीसा कृष्ण का पाठ करे उर धारी
अष्ट सिद्धी नव निधी फल लाहे पदरथ चारी II
आओ हरी पुनी माखन चाखो, आज लाज भक्तन की राखो
गोलकपोल चिबुक अरुणारे, मृदुलमुस्कान मोहिनी दारे
रणजीत राजीव नयन विशाला, मोर मुकुट वैजयंती माला
कुंडल श्रवण पीतपात आचे, कटी किंकिणी काछन काछे
नील जलज सुंदर तनु सोहे, छवी लाखी सूर नर मुनी मना मोहे
मस्तक तिलक अलक घुन्घराले, आओ श्याम बंसुरी वाले
करी पाई पान, पुतानाहीन तार्यो, आका बाका कागासूर मार्यो
मधुवन जलत अग्नी जाब ज्वाला, भये शीतल, लखितहीन नंदलाला
सुरपती जब ब्रिज चाढ्यो रिसाई, मुसर धर बारी बर्साई
लगत लगत ब्रिज चाहन बहायो, गोवर्धन नखधारी बचायो
लाखी यशोदा मन भ्रम अधिकाई, मुख महान चौदाह भुवन दिखाई
दुष्ट कंस अति उधम माचायो, कोटी कमल कहन फुल मंगायो
नाठी कालीयाहीन तब तुम लिन्हे, चरणचिन्ह दाई निर्भय कीन्हे
करी गोपिन संग रास विलासा, सबकी पुरन करी अभिलाषा
केतिक महा असुर संहार्यो, कंसही केश पकडी दाई मार्यो
मातु पिता की बंदी छुडायी, उग्रसेन कहन राज दिलायी
माही से मृतक छाहो सुत लायो, मातु देवकी शोक मीटायो
भोमासुर मुरा दैत्य संहारी, लाये शतदश साहस कुमारि
दाई भिनहीन त्रीन्चीर संहारा, जरासिंधू राक्षस कहन मारा
असुर वृकासूर आदिक मार्यो, भक्तन के तब कष्ट निवार्यो
दिन सुदामा के दुख तार्यो, तंदुल तीन मूठी मुख दार्यो
प्रेम के साग विदुरा घर मांगे, दुर्योधन के मेवा त्यागे
लाखी प्रेमकी महिमा भारी, नौमि श्याम दिनन हितकारी
मारथ के पार्थ रथ हांके, लिये चक्र कर नहीन बाल थाके
नीज गीता के ग्यान सुनाये, भक्तन हृदय सुधा बरसाये
मीरा थी ऐसी मतवाली, विष पी गयी बजाकर ताली
राणा भेजा सांप पिटारी, शालिग्राम बने बनवारी
नीजमाया तुम विधिहीन दिखायो, उरते संशय सकल मीटायो
तव शत निंदा करी तत्काला, जीवन मुक्त भयो शिशुपाला
जबहीन द्रौपदी तेर लगाई, दीनानाथ लाज अबजाई
असा अनाथ के नाथ कन्हैया, दुबत भंवर बचावात नैया
सुंदरदास आस उर धारी, दयादृष्टी कीजे बनवारी
नाथ सकल मम कुमती निवारो, छामोबेगी अपराध हमारो
खोलो पट अब दर्शन दीजे, बोलो कृष्ण कन्हैया कीजै
यह चालीसा कृष्ण का पाठ करे उर धारी
अष्ट सिद्धी नव निधी फल लाहे पदरथ चारी II







































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